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राजस्थान में राजपूत हुए हिंसक, सरकार उठा रही है ढिलाई का खामियाजा


जयपुर / नागौर। आनंदपाल एनकाउंटर प्रकरण में आखिरकार सरकार की ढिलाई ही उसके गले की फांस बन गई है। आनंदपाल की लाश का वक्त रहते जबरन अंतिम संस्कार नहीं करना सरकार को भारी पड़ गया है। एनकाउंटर में मारे गए कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के परिजन के समर्थन में राजपूत समाज लामबंद होने के साथ ही हिंसक भी हो चुका है। गुरुवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मामले की जानकारी ली। सांवराद में कर्फ्यू जारी है। हजारों राजपूत गांव में डटे हुए हैं। 19वें दिन भी आनन्दपाल की लाश के अंतिम संस्कार की राह नहीं निकल सकी है। राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने सीबीआई जांच की मांग पर फिर बयान दिया है कि सीबीआई जांच चाहिए तो कोर्ट जाएं।

 

अपनी मांगें मनवाने के लिए बुधवार को आनंदपाल सिंह के पैतृक गांव सांवराद में आयोजित हुंकार रैली व श्रद्धांजलि सभा में प्रदेशभर से एकत्र हुए 60 हजार से ज्यादा राजपूत हिंसक हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की एक गाड़ी फूंक दी और एक जगह रेलवे ट्रैक भी उखाड़ दिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इस झड़प में 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने एसपी परिस देशमुख समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर गोलियां चला दीं। इससे एसपी बाल-बाल बच गए। उपद्रवियों ने पुलिस की एके-47 समेत कुछ हथियार छीन लिए जो अभी तक बरामद नहीं हो सके हैं।


कुख्यात अपराधी आनंदपाल सिंह 24 जून को पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। परिजन की मांग पर दोबारा पोस्टमार्टम कराने के बाद जब शव उसके पैतृक गांव लाया गया, तब परिजन अंतिम संस्कार नहीं करने पर अड़ गए थे। प्रशासन ने लाश से संक्रमण फैलने की आशंका जताते हुए उसके परिजन को नोटिस देकर जबरन अंतिम संस्कार कराने की चेतावनी दी थी। तब तक करणी सेना के अध्यक्ष कल्याण सिंह कालवी सांवराद भी नहीं पहुंचे थे। प्रशासन की इस चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ और मामला बढ़ते-बढ़ते यहां तक पहुंच चुका है।

 


परिजन ने अब तक उसके शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया। एनकाउंटर की सीबीआई जांच कराने, परिवार की जब्त सम्पत्ति वापस छोडऩे, दुबई में रह रही आनंदपाल की बड़ी बेटी चीनू के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं करने सहित अन्य मांगों पर अड़े राजपूत समाज ने सरकार से वार्ता की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलते देख भीड़ हिंसक हो गई।
झड़प में पुलिस अधीक्षक देशमुख समेत 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए और दो अन्य पुलिसकर्मी अभी लापता हैं।
उपद्रवियों ने भारी उत्पात मचाया। रेलवे स्टेशन पर न सिर्फ रेलवे ट्रैक को उखाड़ दिया बल्कि बुकिंग काउंटर पर भी तोडफ़ोड़ और आगजनी की। एसपी की गाड़ी को भी आग लगा दी। दो पुलिस गार्डों के हथियार भी छीन लिए।
श्रद्धांजलि सभा को देखते हुए नागौर, बीकानेर और चूरू में इंटरनेट सेवा पर चार दिन से रोक लगाई हुई है। इसके बावजूद सांवराद में हजारों राजपूत एकत्र हुए। गोलीबारी में तीन युवकों लालचंद, महेन्द्र सिंह और नंद सिंह के साथ खेमराज नाम के पुलिसकर्मी की हालत गंभीर होने पर जयपुर रेफर कर दिया गया। इनमें लालचंद की जयपुर ले जाने के दौरान रास्ते में मौत हो गई। वहां बाकियों की हालत गंभीर बताई गई है। एक पुलिस वाला अभी लापता है जबकि उसकी फटी हुई वर्दी ही बरामद हुई है।

लोगों ने दिल्ली जोधपुर रेल मार्ग को जाम कर उसे क्षतिग्रस्त करना शुरू कर दिया था और पुलिस को उनको रोकने का प्रयास करने पर लाठी भाटा जंग शुरू हो गई। रेल मार्ग श्रतिग्रस्त हो जाने के कारण दिल्ली-जोधपुर वाया रेवाड़ी मार्ग पर फिलहाल यातायात बाधित है।

सांवराद गांव में स्थिति तनावपूर्ण है। भारी संख्या में पुलिस तैनात की गई है और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आनंदपाल सिंह का अन्तिम संस्कार कब होगा इसको लेकर असमंजस बना हुआ है।

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